Mehfil-e-shayari (महफ़िल-ए-शायरी)

hai andaaz-e-guftagoo kya, justajoo-e-yaar kya,

hai jashn-e-zindagi kya, alfaaz-e-rang-o-boo kya,

hai umeed-e-sahar kya, daastan-e-zindagi kya

hai noor-e-khuda kya, tamanna-e-dil kya..

 

hona kya hai, na hona kya,

chahat kya hai, hai khwaish-e-mehdomiat kya,

firdaus kya hai, nazaara-e-watan kya,

jannat kya hai, jamal-e-yaar kya..

 

arsh kya hai, hai arsh-e-bareen kya,

kaifiyat-e-rooh kya hai, hai khaak-e-dilli kya,

lazzat-e-ishq kya hai, farmaan-e-haq kya,

mohal mujasim kya hai, hai aarzoo-e-rang kya..

 

 

IN DEVANAGARI SCRIPT :

है अंदाज़-ए-गुफ्तगू  क्या, जुस्तजू-ए-यार क्या
है जश्न-ए-ज़िन्दगी क्या, अल्फाज़-ए-रंग-ओ-बू क्या
है उम्मीद-ए-सहर क्या, दास्तान-ए-ज़िन्दगी क्या
है नूर-ए-खुदा क्या, तमन्ना-ए-दिल क्या

होना क्या है, ना होना क्या
चाहत क्या है, है ख्वाहिश-ए-महदोमियत क्या
फिरदौस क्या है, नज़ारा-ए-वतन क्या
जन्नत क्या है, जमाल-ए-यार क्या

अर्श क्या है, अर्श-ए-बरीं क्या
कैफियत-ए-रूह क्या, है ख़ाक-ए-दिली क्या
लज्ज़त-ए-इश्क क्या है, फरमान-ए-हक क्या
मोहल  मुजस्सिम क्या है, है आरज़ू-ए-रंग क्या ..

*Meanings :

Mehdomiat – nothingness

Mohal mujasim – paradox

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